IPC Section 410 – The Indian Penal Code – भारतीय दण्ड संहिता की धारा 410

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Central Government Act IPC Section 410 in The Indian Penal Code

Stolen property- The property, whose possession / receipt has been transferred by theft, or by exemption or by robbery, and the property, whose criminal misappropriation has been done, or which has violated criminal custody, is called a stolen property, whether it is The transfer or misappropriation or breakdown has been done within India or outside. But if such property subsequently enters the possession of such person, who is legally entitled to possession or legal owner, then it is no longer a stolen property.

  1. The criminal can be given 10 years of imprisonment as a punishment.
  2. This is a non-bailable, cognizable offense and considered by the court and this crime is not worth the compromise.

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भारतीय दंड संहिता (IPC) की  धारा-410

चुराई सम्पत्ति- वह संपत्ति, जिसका कब्जा/प्राप्ति चोरी द्वारा, या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा अंतरित किया गया है, और वह संपत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है, चुराई हुई संपत्ति कहलाती है, चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर। किंतु यदि ऐसी संपत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुंच जाती है, जो उसके कब्जे के लिए वैध रूप से हकदार है या वैधानिक मालिक है, तो वह चुराई हुई संपत्ति नहीं रह जाती।

  1. अपराधी को दंड के रूप में 10 साल की कैद की सजा दी जा सकती है।
  2. यह गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और अदालत द्वारा माना जाता है और यह अपराध समझौता करने लायक नहीं है।

इन धाराओं के बारे में भी जाने-

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