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बनारसी अंदाज में दिखे जर्मन राजदूत वाल्टर जे, लिखा - काशी वाकई अद्भुत शहर, मनाएंगे बनारस में दशहरा

AAKASH TIWARI 14 Oct 2021 735

वाराणसी : मस्ती, अल्फाजों में गुरु और राजा का संबोधन, तारीफ भी गालियों से करना, चाय की दुकान पर एंजलीना जॉली से लेकर मिशेल ओबामा तक की बतकही एक साथ शायद बनारस में ही संभव है। बाबा के धाम में उनके भक्तों का तांता और घाटों की शांति, गंगा की धारा का सुकून सारी परेशानियों को निगल जाता है, क्योंकि यहां आकर हर शख्स पिघल जाता है। बनारस के इन्हीं अंदाज का लुफ्त उठाने भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनर पहुंचे है। लिंडनेर इस बार दशहरा काशीवासी में मनाएंगे।

गुरुवार की सुबह जर्मन के German Ambassador to India नौका विहार किया और सुबह-ए-बनारस का लुफ्त उठाया। उन्होंने उसकी तस्वीर अपने ट्वीटर साझा करते हुए लिखा कि वाराणसी (बनारस, काशी) को हिंदुओं द्वारा नदियों के सबसे पवित्र स्थान के रूप में माना जाता है। नदी के किनारे 90 घाट हैं, जहां गंगा के पानी से जीव शुद्ध होते हैं, और मृत्यु को मोक्ष (मृत्यु और पुनर्जन्म के अंतहीन चक्र से मुक्ति) प्राप्त करने के लिए लाया जाता है। साथ उन्होंने एक साधु के साथ गंगा में नौकायन का आनंद लिया और अभिभूत नजर आए।

आगमन से पूर्व 13 अक्टूबर को भी उन्होंने काशी दौरे को लेकर ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा- हर बार किसी अन्य के विपरीत अनुभव। दशहरा (विजयदशमी) सबसे बड़े हिंदू त्योहारों में से एक है और नवरात्रि का अंत, शुक्रवार, 15 अक्टूबर को पड़ता है। शमी पूजा, अपराजिता पूजा और सीमा हिमस्खलन इस दिन अपराहन (शुरुआती) के दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान हैं। एक विचार आया कि इसे कहां मनाया जाए। बस आगे बढ़ें। इस साल दशहरा दिल्ली में नहीं, बल्कि हिंदू धर्म के 7 पवित्र शहरों में से सबसे पवित्र में, पृथ्वी पर सबसे पुराना शहर, तीर्थयात्रा का शानदार केंद्र, रहस्यवाद, कविता – और शहर में मृत्यु के माध्यम से मुक्ति: वाराणसी। शाम का आगमन।


बनारसी अंदाज में दिखे जर्मन राजदूत वाल्टर जे, लिखा - काशी वाकई अद्भुत शहर, मनाएंगे बनारस में दशहरा
AAKASH TIWARI
14/10/2021
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