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वाराणसी : कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्‍था की डुबकी, दुल्हन बने घाट

SANDEEP KR SRIVASTAVA 19 Nov 2021 409

वाराणसी : कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर काशी में आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व व अलौकिक नजारा देखने को मिल रहा है।जहां काशी के पावन घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का रेला लगा हुआ है।आज भोर से ही गंगा जी ने स्नान करने के लिए दूर- सुदूर से लोग पहुंच रहे हैं।भोले नाथ की नगरी काशी में गंगा स्नान करने का अपना एक अलग ही धार्मिक महत्व है, और कार्तिक मास के पूर्णिमा में स्नान करने का तो अपना एक विशेष ही स्थान है।

आज कार्तिक माह का अंतिम स्नान पर्व है, और इसके लिए आज काशी के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान कार्तिकेय से प्रार्थना करे हैं, और स्वस्थ रहने की कामना कर रहे हैं।

काशी के घाटों में जगह नहीं हैं और ग्रह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बनने के कारण कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व है।काशी पहुंचे श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के साथ-साथ दान-पुण्य कर रहे हैं औऱ पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ था।आज ही के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार का रूप धारण किया था।कहा जाता है, कि कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और पूजा करने वाले को अक्षय पुण्य और स्वस्थ जीवन मिलता है। इसलिए आज विश्वनाथ नगरी में स्नान करने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है और मान्यता है कि इस दिन देवता भी दिवाली मनाने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रिपुर के वध से प्रसन्न होकर देवताओं ने काशी में पंचगंगा घाट पर दीपोत्सव का आयोजन किया था और इसकी मान्यता के अनुसार आज देव दीपावली मनाई जाती है। आज के ही दिन काशी राजा देवदास ने अपने राज्य में देवताओं को प्रतिबंधित कर दिया था।इसके बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने रुप बदलकर पंचगंगा घाट पर स्नान किया और पूजा अर्चना की थी। जब ये बात राजा देवदास को पता चली तो उन्होंने प्रतिबंध को समाप्त कर दिया और इससे खुश होकर देवताओं ने दिवाली मनाई।

आज वाराणसी के गंगा घाट 15 लाख दीयों से जगमग होंगे।काशी की ये विश्व विख्यात देव दीपावली को देखने के लिए देश ही नही विदेशों से भी लाखों की संख्या मे पर्यटक आते है।आज पर्व पर घाट, कुंड, गलियां और चौबारे दीपों से रौशन होंगे, साथ ही घाटों पर लेजर शो दिखेगा।वहीं पहली बार कन्याएं मां गंगा की आरती उतारेंगी और 108 किलो फूल से श्रृंगार किया जाएगा। देव दीपावली की रात शिव की नगरी का नजारा देवलोक का आभास कराएगा।घाट, कुंड, गलियां, चौबारे और घर की चौखट दीयों की रौशनी से जगमग होगी।अस्सी से राजघाट तक 84 घाटों के बीच 22 से अधिक जगहों पर गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा।शहर से लेकर गांव, घाट और नदियों के किनारों को रौशनी से सजाने की तैयारियां चल रही हैं। चेतसिंह घाट, राजघाट पर लेजर दिखाया जाएगा।

रामनगर संवाददाता के अनुसार आज भोर से ही यहाँ बलुआ घाट पर श्रद्धालुओं का गंगा जी मे डुबकी लगाने का सिलसिला लगातार जारी है।रामनगर प्रसाशन व समाजिक संस्थायें भीड़ को देखते हुए पूरे तरह से मुस्तैद दिखी।


वाराणसी : कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्‍था की डुबकी, दुल्हन बने घाट
SANDEEP KR SRIVASTAVA
19/11/2021
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