सपा-बसपा के नेताओं का भाषण सुनके लगता है, जैसे यूपी में सिर्फ मुसलमान रहते है

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आजकल मायावती की पार्टी और उसके नेताओं, अखिलेश यादव की पार्टी और उसके नेताओ
इनका भाषण सुनिये, मुसलमान से शुरू होता है, और मुसलमान पर जाकर ख़त्म होता है, ऐसा लगता है जैसे मुसलमान के अलावा यूपी में कोई रहता ही नहीं

भारत में जो नेता स्वयं को सेक्युलर बताते है, असल में वो कितने सांप्रदायिक हैं
ये तो अबतक आप लोग समझ चुके होंगे, और अभी तक नहीं समझे, तो कदाचित आपमें ही भारी कमियां है, खैर

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मायावती केवल 1 ही मुद्दा लेकर चल रही है
मुसलमान वोट दो, मुसलमान वोट दो, सत्ता में आये तो मुसलमानो के लिए काम करेंगे, मुसलमानो को भी आरक्षण देंगे, मुसलमानो को ये देंगे
मुसलमानो को वो देंगे, मंत्री बनाएंगे, इतने मंत्री बनाएंगे जितने पहले किसी ने नहीं बनाये

वहीँ अखिलेश यादव और राहुल गाँधी ने गठबंधन कर लिया है
दोनों का कहना है की, “सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए हमने गठबंधन किया है”

ये दोनों ही पार्टियां मसलन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों की दोनों दंगे में एक्सपर्ट है, 5 साल में अखिलेश यादव के राज में 1192 दंगे हुए है, और 1947 तक कांग्रेस के ज़माने में कितने दंगे हुए है
ये तो आप जानते ही होंगे

और ये लोग स्वयं को सेक्युलर और दूसरों को सांप्रदायिक बताते है, इनका कहना है की
बीजेपी आ जाएगी उसे रोकने के लिए हम साथ है, बीजेपी आएगी तो मुसलमानो का ये कर देगी, मुसलमानो पर यूनिफार्म सिविल कोड लाद देगी, इत्यादि इत्यादि

ये सभी नेता कह रहे है की, हम मुसलमानो के लिए ये करेंगे, हर मुस्लिम युवक को नौकरी देंगे, हर मुस्लिम लड़की को पढाई के नाम पर आर्थिक मदद देंगे

सभी के सभी मुसलमानो के लिए ही काम करना चाहते है, पर यहाँ सवाल ये है की
बाकि लोगों के लिए ये काम कौन करेगा, इस देश के लिए, उत्तर प्रदेश के लिए काम कौन करेगा

हिन्दुओ के पास अभी भी समय है, अभी वोट हुए नहीं है, जातिवाद के चश्मे को उतारकर इस बार वोट दें
वैसे भी पश्चिम बंगाल का उदाहरण तो देख ही रहे है