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वाह रे पापी पेट तू जो न करा दे, वाह रे गरीबी । विशेष ख़बर

AAKASH TIWARI 17-10-2018 78


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वाराणसी । हरहुआ जिंदगी के जद्दोजहद में गरीबी से जूझ रही फुलपत्ति ने अपना रास्ता खुद चुनकर एक कुशल राजगीर बन आज लोगो का आशियाना बनाकर मजदूरी से परिवार का भरण पोषण कर रही है। हरहुआ विकास खण्ड के मढ़वा में 25 वर्षो से परिवार के साथ जीवन जी रही है। जिंदगी की अजीब कहानी है। 23 वर्ष पूर्व निगतपुर कछवा मिर्जापुर के ननिहाल मढ़वा में रह रहे महेंद्र पटेल के साथ शादी हुई। नाना के गुजर जाने के बाद महेंद्र अनपढ़ पत्नी फुलपत्ति को लेकर किराये के मकान में रहकर ईंट-गारा की मजदूरी कर जीवन बसर करने लगा। जिनसे दो बेटीयाँ और दो बेटे हुए। इसी बीच पति बीमार हो गया और फुलपत्ति की चिंता बढ़ गई। दिन -रात कड़ी मेहनत से मजदूरी करने में जुटी रही। अधिक पैसे कमाने और राजगीर बनने की जज्बा को लेकर पति के साथ ठीकेदार श्यामनरायन के हौसला आफजाई से कुशल राजगीर (मिस्त्री) बन गई। अब पति -पत्नी एक साथ पांच -पांच सौ यानि एक हजार प्रतिदिन कमाने लगे और खुश रहने लगे।

बच्चों के परवरिश की समस्या

पहले एक सौ रूपये रोज की मजदूरी से काम शुरू किया था।उसीसे बच्चों की पढ़ाई -लिखाई और परवरिश चलता रहा। जब राजगीर की मजदूरी बढ़ी तो पहली बेटी शशिकला की शादी किया। दूसरी बेटी पूजा और पुत्र वतन कुमार व् आकाश को पढ़ा लिखा रही है। गरीबी देख जब बच्चे भी मजदूर बनकर हाथ बटाना चाहे तो फुलपत्ति ने कहा कि तुम लोगो को पढ़ लिखकर बड़ा बनना है।

नियमित काम न मिलने की दिक्कतें

बरसात के महीने में काम नही मिलने पर छोटा -मोटा काम कर भी चार पैसे कमाती रही। जब बिल्डिंग निर्माण के सामान की महगाई आई तो कहीँ काम न होने से परेशानी उठाती रही।लेकिन ज्यों ही सामान सस्ती हुई तो नियमित रूप से 8से9 घण्टे काम राजगिरी की पुनः शुरू हो गई। बिना किसी नागे के अब काम चल रहा है।

निरक्षर होने का दर्द

फुलपत्ति जहाँ कुशल राजगीर बनकर जोड़ाई,प्लास्टर ,छत ढलाई सहित नक्काशीदार कार्य कर लेती है वही फीते के नाप को पढ़ नही पाती।इस काम में पति महेंद्र पटेल साथ देता है।काम पर साईकिल से ले जाने व् ले आने का काम भी पति करता है। पति से ज्यादा तेजी से काम कर सबको खुश कर देती है।लेकिन अनपढ़ होने का दर्द साल रही है।

गरीबी के दर्द को झेलने की नियति

फुलपत्ति के पास निजी मकान नही वह किराये के मकान में मजबूरन रह रही है। एक अदद 3 यूनिट का मात्र राशन कार्ड बना है।वोट हर बार देती है लोग जमीन पट्टा,आवास,श्रम विभाग से मिलने वाली सुविधाये दिलाने का आश्वासन देते है लेकिन आज तक कुछ मिला नही। ब्लाक व् प्रधान से भी गुजारिश कर उम्मीद बनाकर दिन गुजार रही है।

उम्मीद कारीगरी के साथ

फुलपत्ति को जहाँ राजगीर बनकर काम करने पर फक्र है वहीँ उम्मीद बनाकर संघर्ष कर रही है और कहती है कि दूसरे का मकान बना रही हूँ जब अपना आशियाना बनाउंगी तो मुझे बेहद ख़ुशी होगी। बच्चों को अच्छी तालीम देने में अपनी गरीबी को आगे आने नही दूंगी। मुझे अपने हुनर ,साहस व् जज्बे पर भरोसा है।बेटी -बेटे की शादी कर एक खुशहाल परिवार का सपना पूरा करूंगी। मुझे साक्षर पति पर पूरा भरोसा है जिन्होंने गरीबी में एक अनपढ़ से शादी कर एक साथ जीने मरने की फर्ज पूरा कर रहे हैं। मेरे लिए मेरा पति की परमेश्वर है और कर्म ही पूजा है।आज कुशल राजगीर (मिस्त्री) के नाम से फुलपत्ति ने अपनी पहचान बना ली है। यहां तक कि क्षेत्र के कुछ परिवार दूसरे से मकान का कोई कार्य नही कराते जब फुलपत्ति खाली होती है तो उसीसे कराते हैं।हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा पर अपने औजारो की पूजा करना नही भूलती। कहती है कि यहीँ तो मेरा अन्नदाता है।

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AAKASH TIWARI
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