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वाराणसी : कोरोना के खौफ पर भारी पड़ी आस्था, लाखों लोगों ने लगाई डुबकियां - हर-हर महादेव से गूँजी काशी

SANDEEP KR SRIVASTAVA 30/11/2020 557


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वाराणसी: कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर सोमवार की सुबह सूर्योदय से पूर्व ही आस्‍थावानों का जमावड़ा गंगा, गोमती और वरुणा आदि नदियों में लगा है.
हर-हर महादेव के साथ हर-हर गंगे का उद्धघोस करते हुए आस्‍थावानों ने नदियों में स्‍नान कर उगते सूर्य को अर्घ्‍य देकर सुख और समृद्धि की कामना की।नदियों के तट पर न पहुंच पाने वाले आस्‍थावानाें ने घरों में ही विशिष्‍ट अनुष्‍ठान कर श्री हरि की पूजा के साथ ही दान कर पुण्‍य की कामना की।
आज सुबह से ही घाटों पर दूर दूर तक आस्‍था का रेला लगा लगा और लोगों ने घाट पर दान पुण्‍य के साथ ही कार्तिक मास पर्यंत पूजन अनुष्‍ठानों का भी पारण कर वर्ष भर के लिए श्री और समृद्धि की कामना की।

हिंदी के बारह मासों में सर्वप्रमुख माना जाने वाला कार्तिक श्रीहरि को समर्पित होता है। इसमें धर्मानुरागीजन विभिन्न नदियों विशेषकर गंगा समेत नदियों में स्नान, दान-यज्ञ, होम, उपासना करते हैैं। अंतिम दिन पूर्णिमा पर मासपर्यंत स्नान का समापन होता है। काशी में यह पर्व देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 30 नवंबर को पड़ी है।
आज सायंकाल गंगा तट पर दीपदान कर पवित्र मास को विदा किया जाता है। पंजाबी लोग गुरुनानक देव का जन्मोत्सव मनाते हैैं। काशी में भगवान कार्तिकेय के दर्शन का भी विधान है।

कार्तिक पूर्णिमा पर शास्त्रों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत रह कर वृष दान करने से शिव पद प्राप्त होता है। गो, हाथी, रथ घोड़ा व घृतादि का दान करने से संपत्ति वृद्धि और पूर्णिमा का व्रत रह कर श्रीहरि स्मरण-आराधना से सूर्य लोक की प्राप्ति होती है। कार्तिकी में स्वर्ण का मेष दान करने से ग्रह-योगों के कष्ट नष्ट होते हैैं। कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ कर हर मास की पूर्णिमा को व्रत से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है।
और आज तो काशी की देवदिवाली और भी खास होने वाली है, क्योंकि देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी इस पावन पर्व पर काशी में ही उपस्थित रहेंगे।
घाटों को दुल्हन की तरह सजाया गया।
काशी पूरी तरह से तैयार है, अपने सांसद का स्वागत करने के लिए।

वही रामनगर से हमारे संवाददाता तपेश्वर चौधरी के अनुसार- रामनगर बलुआ घाट, पुलिसिया घाट पर भी दूर दराज से आये हुए श्रद्धालुओं ने भोर से ही डुबकी लगाई।
रामनगर प्रसाशन का योगदान सराहनीय और काबिलेतारीफ रहा, पूरे मुस्तैदी से रामनगर प्रसाशन डटी है, और श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत नही होने दे रही है।
वही दूसरी तरफ़ सामाजिक संगठन भी श्रद्धालुओं का पूरी तरह से ख्याल रख रहें है।

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SANDEEP KR SRIVASTAVA
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