सोनभद्र में 825 किलो गांजा तस्करी मामले में बड़ा फैसला, दो दोषियों को 10-10 साल की सजा

CHIEF EDITOR - AAGAZ INDIA NEWS
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825 किलो गांजा तस्करी मामले में दोषियों को सजा सुनाती सोनभद्र की अदालत

जनपद सोनभद्र में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रही सख्त कानूनी कार्रवाई के बीच एक अहम न्यायिक निर्णय सामने आया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो गोरखपुर द्वारा दर्ज किए गए एक बड़े एनडीपीएस मामले में माननीय न्यायालय सोनभद्र ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह मामला वर्ष 2024 में पकड़ी गई भारी मात्रा में अवैध गांजा की तस्करी से जुड़ा हुआ है, जिसे गंभीर अपराध मानते हुए एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की गई थी।

9 जुलाई 2024 को हुई थी बड़ी बरामदगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रकरण एनसीबी अपराध संख्या 01 वर्ष 2024 के रूप में पंजीकृत किया गया था। घटना की तिथि 9 जुलाई 2024 है, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो गोरखपुर की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक संयुक्त अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान कुल 825 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया था।

इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी को देखते हुए जांच एजेंसियों ने इसे संगठित तस्करी का मामला मानते हुए अभियुक्तों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20/25/29 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद मामले की विस्तृत विवेचना की गई और साक्ष्यों को संकलित कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।

दो अभियुक्त दोषी, अन्य को राहत

लंबी सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद माननीय न्यायालय सोनभद्र ने सर्वेश सिंह पुत्र विक्रम सिंह, निवासी मलिकपुर अकोडिया, थाना मंगलपुर, जनपद कानपुर देहात तथा अभिरल सिंह पुत्र धूप सिंह, निवासी बड़हरा, थाना भोरे, जनपद गोपालगंज, बिहार को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के अंतर्गत दोषी पाया।

न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे अपराधों में कड़ा दंड आवश्यक है।

हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने धारा 28/29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दोनों अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही इस मामले में नामजद अन्य अभियुक्तों शुभम त्रिपाठी, राकेश यादव उर्फ लुहुर और मनीष तिवारी को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया। अदालत का कहना था कि इनके विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक कसौटी पर सिद्ध नहीं हो सके।

तस्करों के लिए कड़ा संदेश

इस फैसले को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक मजबूत और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एनसीबी और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा की बरामदगी और दोषियों को मिली सजा यह दर्शाती है कि कानून के शिकंजे से कोई भी तस्कर बच नहीं सकता।

अधिकारियों के अनुसार एनडीपीएस मामलों में मजबूत साक्ष्य, तकनीकी जांच और प्रभावी पैरवी के चलते दोषियों को सजा दिलाई जा रही है। आने वाले समय में भी मादक पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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